डीन

डीन, इंजीनियरिंग संकाय
प्रो. वाई एन श्रीकांत
ईमेल: dean.engg@iisc.ac.in
संपर्क करें: 91- 80 – 2293 2044

वाई.एन. श्रीकांत ने बेंगलूर विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक्स में अपनी बी.ई. और भारतीय विज्ञान संस्थान के कंप्यूटर विज्ञान और स्वचालन विभाग से कंप्यूटर विज्ञान में एम.ई. और पीएच.डी हासिल की। संकलक डिजाइन और प्रोग्रामिंग भाषाएं इके रुचिकर क्षेत्र हैं। वे 1987 में एक सहायक प्रोफेसर के रूप में सीएसए विभाग में शामिल हुए और वर्ष 2000-2005 के दौरान उन्होंने सीएसए के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

डीन, विज्ञान संकाय
प्रो. ए जी सैमुवेल्सन
ईमेल: dean.sci@iisc.ac.in
संपर्क: 91-80-2293 3355

अशोक सैमुवेल्सन ने आईआईटी मद्रास (एम.एससी, 1978) और कॉर्नेल विश्वविद्यालय (पीएच.डी, 1983) से रसायन में अपनी शिक्षा हासिल की। वे 1983 में भारतीय विज्ञान संस्थान में शामिल हुए, और मार्च 1983 से लेकर आईआईएससी में अकार्बनिक और भौतिक रसायन विज्ञान विभाग में संकाय सदस्य रहे हैं। उनके शोध करने की रूचि नवीन उत्प्रेरक बनाने की दृष्टि से ऑर्गेनोमेट्रैलिक और समन्वय रसायन शास्त्र में संरचना गतिविधि संबंधों के क्षेत्र में हैं।

डीन, स्नातक कार्यक्रम
प्रो . बालाजी जागीर्दार
ईमेल: dean.ug@iisc.ac.in
संपर्क: 91-80-2293 3554/2825/3184

एसोसिएट डीन, स्नातक कार्यक्रम
प्रो नागसुमा चंद्रा
ईमेल: ascdean.ugacad@iisc.ac.in
संपर्क: 91-80-2293 3554/2892
91-80-2360-1552/2360-0683
नागसुमा चंद्रा ने संरचनात्मक जीव विज्ञान के क्षेत्र में नेहरू शताब्दी ब्रिटिश फैलोशिप के तहत वर्ष 1992 में ब्रिटेन के ब्रिस्टल विश्वविद्यालय से पीएचडी प्राप्त की। इसके बाद वे शुरू में एक पोस्टडॉक्टोरल फेलो के रूप में भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलूर में शामिल हुईं और बाद में अपना अनुसंधान ग्रुप प्रारंभ किया। नागासुमा चंद्रा वर्तमान में जीव रसायन विभाग में प्रोफेसर हैं और इसके अतिरिक्त संस्थान में जैविक इंजीनियरिंग और गणितीय जीव विज्ञान पहलों से संबद्ध हैं। उन्होंने आणविक प्रणालियों के जीव विज्ञान के क्षेत्र की स्थापना की और संस्थान में जैव सूचना विज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसका शोध अंतःविषयक से संबंधित है जिसमें जटिल जैविक प्रक्रियाओं के कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग को शामिल किया गया है ताकि जीनोम-वाइड आणविक नेटवर्क विभिन्न प्रकार के तनावों की प्रतिक्रिया करने के बारे में मूलभूत प्रश्नों का समाधान कर सके और उस ज्ञान को जैव चिकित्सा अनुप्रयोगों में कैसे अंतरित किया जा सकता है। वे भारतीय विज्ञान अकादमी की प्रवरित फेलो हैं।