निदेशक

प्रो. गोविंदन रंगराजन ने पिलानी के बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस से इंटीग्रेटेड एमएससी (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की और यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड, कॉलेज पार्क, यूएसए से पीएचडी की। इसके बाद उन्होंने 1992 में भारत लौटने से पहले कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले के लॉरेंस बर्कले लैब में कार्य किया। वे 1992 से भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के गणित विभाग के संकाय सदस्य रहे हैं। वर्तमान में वे आईआईएससी के निदेशक हैं।

प्रो रंगराजन के शोध के रुचि में नॉनलीनियर डायनेमिक्स और अव्यवस्था और टाइम सीरीज विश्लेषण शामिल हैं। वे जेसी बोस नेशनल फेलो हैं। वे भारतीय विज्ञान अकादमी और नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंडिया के फेलो भी हैं। उन्हें फ्रांस सरकार द्वारा शेवेलियर डैन्स एल’ऑर्ड्रे डेस पाल्स एकेडमिक्स (नाइट ऑफ द ऑर्डर ऑफ एकेडमिक पाम्स) से सम्मानित किया गया। वे होमी भाभा के फेलो भी थे।

इंडो-फ्रेंच साइबर विश्वविद्यालय परियोजना के सह-पीआई के रूप में उन्होंने प्रथम अंतर-महाद्वीपीय उपग्रह आधारित पाठ्यक्रमों की स्थापना में मदद की। उक्त पाठ्यक्रम विभिन्न विषयक क्षेत्रों में भारतीय और फ्रांसीसी छात्रों को लाइव पढ़ाया जाता था। उन्होंने राष्ट्रीय गणित पहल का भी नेतृत्व किया, जिसके द्वारा गणित और अन्य क्षेत्रों के बीच इंटरफेस पर अत्याधुनिक क्षेत्रों में अनुदेशात्मक स्कूलों और कार्यशालाओं को चलाया जाता है। गणितीय विज्ञान में अंतःविषय पीएचडी कार्यक्रम की स्थापना और संचालन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने गणित और सांख्यिकी विज्ञान के लिए भारत-अमेरिका आभासी संस्थान का नेतृत्व भी किया, जिसे नेशनल साइंस फाउंडेशन, यूएसए और इंडो-यूएस साइंस एंड टेक्नोलॉजी फोरम, इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित किया गया था। वे वर्तमान में अनुप्रयुक्त गणित के लिए भारत-फ्रेंच केंद्र (आईआईएफकेएम) के निदेशक हैं, जो भारत में सीएनआरएस, फ्रांस का पहला यूनिटेस मिक्सेट्स इंटरनेशनल्स है। यह भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और फ्रांसीसी संस्थानों के एक कंसोर्टियम के बीच एक संयुक्त उद्यम है। आईआईएफकेएम अनुप्रयुक्त गणित के व्यापक क्षेत्र में भारत और फ्रांस के बीच संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं का समर्थन करता है।

प्रो. रंगराजन 2002 से 2008 तक गणित विभाग के अध्यक्ष तथा डिजिटल सूचना सेवा केंद्र के संयोजक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वे 2008 से 2014 तक अंतर्राष्ट्रीय संबंध प्रकोष्ठ (जिसे अब अंतर्राष्ट्रीय संबंध कार्यालय कहा जाता है) के अध्यक्ष रहे। हाल ही में, वे 2014-2020 से अंतःविषयक अनुसंधान प्रभाग (जिसमें 10 विभाग और केंद्र शामिल हैं) के अध्यक्ष थे। उन्होंने 2015-2020 से अध्यक्ष, विकास और पूर्व छात्र व्यवहार कार्यालय के रूप में अपनी भूमिका में आईआईएससी के धन उगाहने वाले और पूर्व छात्रों के आउटरीच प्रयासों का भी नेतृत्व किया ।

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